My Humble Request and Appeal to All Concerned

ब्रह्माकुमारीज मैंनेजमेंट कमेटी के सदस्य कृपया पुनर्विचार कर समाधान प्रदान करें
 

 

ओम शांति । हमारा यह ईश्वरीय यज्ञ जो विशेष बहनों की संस्था है जिसमें भाई मददगार हैं और हम गर्व से कहते भी हैं कि विश्व की सबसे बड़ी संस्था है जो बहनों द्वारा ही संचालित है।

क्योंकि बाबा इस अपवित्र दुनिया को पवित्र बनाने आये हैं इसलिए यज्ञ में सबसे संगीन अपराध है अपवित्रता का। अपराधिक सीमाओं को पार करने वाला ये केस जब सामने आया तो इस आत्मा के लिए क्या निर्णय लिया?

अनेक लोग इसके साक्षी होते हुए भी ऐसे केस को दबा लेना चाहिए क्या?

इस केस में निर्वैर जी के द्वारा उस आत्मा को भेजा वो ईमेल आज भी इस घटना का साक्षी है। क्या ऐसा गंभीर केस मैनेजमेंट कमेटी के सामने नहीं रखना चाहिए था?

वो दोनों भाई भी साक्षी हैं जिनके सामने ऐसे व्यक्ति को माफी देकर केस को दबा लिया गया और बिना किसी प्रकार की सजा दिये उस आत्मा को यज्ञ की शरण में रखा हुआ है।

ब्राह्मण परिवार के सभी बी के भाई बहनें इस ऐसी आत्मा के जीवन चरित्र को जिस व्यक्ति ने इतना घृणित कृत्य संस्था में किया है क्या वो बी के कहलाने के योग्य है भी?
ऐसे व्यक्ति को दबंगई दिखाने के लिए ब्रह्माकुमारीज के ज्ञान सरोवर परिसर में खुला ही नहीं छोड़ा हुआ है बल्कि कई यज्ञ के भाई बहनों ने इसे अपना सलाहकार बनाया हुआ है।
एक तरफ बाबा के सच्चे बच्चे इस ईश्वरीय यज्ञ में ज्ञान योग फैलाने का पुण्य कार्य कर रहे हैं और दूसरी तरफ उस जैसी क्वालिटी के लोग यज्ञ में घृणा फैला कर पाप के कार्य में जुटे हुए हैं। यज्ञ में कुछेक उनकी बातें सुनने के लिए मधुबन यज्ञ में बैठकर संगमयुग का अमुल्य समय नष्ट कर रहे हैं।

आप स्वयं ही विचार कर सकते हैं कि यज्ञ की शरण में पलते ऐसी आत्माओं का यज्ञ में किस प्रकार का योगदान हो सकता है?

फिर भी क्या ऐसी चरित्र वाली आत्मा को फेवर करने वाले कुछ लोग, ऐसी आत्मा की वास्तविक इमेज ( Image ) को सबके सामने झुठलाने की कोशिश करेंगे? ऐसा करके ब्राह्मण परिवार की आंखों में धूल झोंक देंगे क्या? इस सच्चाई को भी परिवर्तन व रिफाईन करके यज्ञ की रोजरी में निकलवाने का दुष्साहस कर सकते हैं?

उस भाई के पत्र, फोटो और प्रुफ इसके साथ नहीं लगा रहा, निर्वैर भाई समझते हैं जब मांगेगे तो सब उनको दे दूंगा।

यज्ञ के समर्पित भाई जो झाड़ू पोंचा करने वाली माईयों के साथ करे दुष्कर्म ऐसा गंभीर अपराध करने वाले को ईश्वरीय यज्ञ प्रदान करता है शरण और सच्चाई से सेवा करने वाले का यज्ञ से निष्कासन? ये कैसा न्याय है?
जो सच्चाई सफाई से सेवा करने वाले ज्ञान सरोवर के नरेश भाई जिसने अपनी सच्चाई की आवाज तब निकाली जब स्वयं ब्रह्माकुमारीज की मैंनेजमेंट कमेटी असामाजिक तत्वों के दबाव में अपना निर्णय लागू नहीं करा पायी। जो आगे चलकर हमारी संस्था के लिए बहुत घातक हो सकता है और भगवान की स्थापित की ये संस्था बदनाम हो सकती है।
जो समर्पित भाई जो करें झाड़ू पोंचा करने वाली माईयों के साथ दुष्कर्म उसको ईश्वरीय यज्ञ में शरण और सच्चाई से सेवा करने वाले का यज्ञ से निष्कासन? जरा सोचिये कि नरेश भाई जो दिल्ली गवर्नमेंट से इन्जीनियर की नौकरी को त्यागपत्र देकर ( पत्र संलघन है ) हुआ हो भगवान के कार्य के लिए मधुबन में तन, मन और धन सहित समर्पण जिसने ज्ञान सरोवर की जमीन से लेकर ज्ञान सरोवर बनवाने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई हो और मधुबन में 25 वर्ष की समर्पित जीवन में हो उसे आप एक इस छोटी सी घटना के कारण उसके संपूर्ण योगदान को दरकिनार करके कर दें एक झटके से निष्कासित, तो ये न्याय हुआ या अन्याय। ब्रह्माकुमारीज संस्था में आने वाले योग्य और शिक्षित युवाओं के लिए आप कैसा उदाहरण पेश करना चाहते हैं। यज्ञ में ऐसा उदाहरण देखकर आज के युवा बाबा के यज्ञ के प्रति कुर्बान जाने की हिम्मत करेंगे या अपने कदम पीछे हटायेंगे? कितना बुरा असर उनके ऊपर पड़ेगा, जरा सोचिये। जिस नरेश भाई ने सबकुछ अपना दे दिया यज्ञ में और जब समर्पित जीवन के 25 वर्ष पूरे करके अपनी साठ साल की आयु की तरफ बढ़ रहा है तो कैसे बीतायेगा वो अपना बाकी जीवन? आखिर कौन सोचकर समाधान करेगा जीवन के इस गंभीर विषय पर?

जब नरेश भाई की सरकार में 12 वर्ष की नौकरी हो गई थी तब उनके लिखे पत्रों और त्यागपत्र बाबा पर उनकी आस्था और यज्ञ के प्रति कुर्बानी स्पष्ट रूप से जाहिर करते हैं। सरकार से छुट्टी न मिलने पर भी बाबा के कार्य का महत्व दिखता है। ये पत्र उस समय के हैं जब मैं ज्ञान सरोवर परिसर का निर्माण कराने आया था।

निर्णय जो मेरे फेवर में लिये गये लेकिन उन निर्णयों को मैंनेजमेंट कमेटी ज्ञान सरोवर के कुछ असामाजिक तत्वों के दबाव के कारण लागू नहीं करा पायी। और उल्टा मुझे ही निष्कासन का शिकार बना दिया गया।
I send a letter to respected Dadi Janki ji, respected Nirwair Bhaiji and Management Committee on 11.10.2018 (You can read this letter by clicking this link) but received no response till now (2018.10.25).
 

लेकिन अब कौन देगा समाधान? क्या प्यारे निराकार शिवबाबा? क्या प्यारे अव्यक्त ब्रह्माबाबा? क्या ब्रह्माकुमारीज की मैंनेजमेंट कमेटी? या विश्व कल्याण की सेवा में जुटा हुआ बेहद का ब्राह्मण परिवार? ये है एक ब्राह्मण आत्मा के जीवन का सवाल।

 

In Baba's Yaad

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