प्यारे अव्यक्त बापदादा के महावाक्य बच्चों प्रतिः-

"...कोई भी बात मेंअगर एक बार समय परबिना कोई संकल्प केआज्ञा समझ कर जो सहयोगी बन जाते हैं

ऐसे समय के सहयोगियों को बाप-दादा भी अन्त तक सहयोग देने के लिए बाँधा हुआ है।

एक बार का सहयोग देने का अन्त तक सहयोग लेने का अधिकारी बनाता है।

एक का सौ गुना मिलने से मेहनत कम,प्राप्ति ज्यादा होती है।

चाहे मन सेचाहे तन से अथवा धन से।

लेकिन समय पर सहयोग दियातो

बाप-दादा अन्त तक सहयोग देने के लिये बांधा हुआ है।

जिसको दूसरे शब्दों में भक्त लोग अन्ध-श्रद्धा कहते हैं।

ऐसा अगर कोई एक बार भी जीवन में बाप-दादा के कार्य में सहयोग दिया है,

 तो अन्त तक बाप-दादा सहयोगी रहेगा।

यह भी एक हिसाब-किताब है। "

संदर्भ-1972/20.05.1972

 सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत

 

 

 

...It is all on the base of study of BapDada's Murlis - BK Naresh, Madhuban (Gyan Sarovar)