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Ref: 03.10.1971

"...यह जो मन है

यह एक बड़ी कैमरा है।

हर सेकेण्ड का चित्र

इसमें खैंचा नहीं जाता?

 

कैमरा तो सभी के पास है

लेकिन

कोई कैमरा नज़दीक के

चित्र को खींच सकती है

और कोई कैमरा

चन्द्रमा तक भी फोटो

खैंच लेती है।

 

है तो वह भी कैमरा,

वह भी कैमरा।

और यहाँ की छोटी- मोटी भी

कैमरा तो है ना।

 

तो हरेक के पास

कितना पावरफुल कैमरा है?

 

जब वह लोग

चन्द्रमा से यहाँ,

यहाँ से वहाँ का खैंच सकते हैं;

तो आप

साकार लोक में रहते

निराकारी दुनिया का,

आकारी दुनिया का

वा इस सारी सृष्टि के पास्ट

वा भविष्य का चित्र

नहीं खैंच सकते हो?

 

कैमरा को पावरफुल बनाओ

जो उसमें जो बात,

जो दृश्य जैसा है

वैसा दिखाई दे,

भिन्न-भिन्न रूप में दिखाई नहीं दे।

 

जो है जैसा है,

वैसे स्पष्ट दिखाई दे।

इसको कहते हैं पावरफुल।..."

 

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