- ओम् शान्ति।
- रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं क्योंकि यहाँ सम्मुख है।
- ऐसे नहीं कहेंगे कि सभी बच्चे अपने स्वधर्म में रहते हैं और बाप को याद करते हैं।
- कहाँ-कहाँ बुद्धि जरूर जाती होगी।
- वह तो हर एक अपने को समझ सकते हैं।
- मूल बात है सतोप्रधान बनने की।
- सो तो याद की यात्रा के सिवाए बन नहीं सकेंगे।
- भल बाबा सुबह में योग में बैठ बच्चों को खींचते हैं, कशिश करते हैं।
- नम्बरवार खींचते जाते हैं।
- याद में शान्ति में रहते हैं।
- दुनिया को भी भूल जाते हैं।
- परन्तु सवाल है - सारे दिन में क्या करते?
- वह तो हुई सुबह में घण्टा आधा घण्टा याद की यात्रा, जिससे आत्मा पवित्र बनती है, आयु बढ़ती है।
- परन्तु सारे दिन में कितना याद करते हैं?
- कितना स्वदर्शन चक्रधारी बनते हैं?
- ऐसे नहीं, बाबा तो सब कुछ जानते हैं।
- अपने दिल से पूछना है कि हमने सारा दिन क्या किया?
- अभी तुम बच्चे चार्ट लिखते हो।
- कोई राइट लिखते हैं, कोई रांग लिखते हैं।
- समझेंगे हम तो शिवबाबा के ही साथ थे।
- शिवबाबा को ही याद करते थे परन्तु सचमुच याद में थे?
- बिल्कुल साइलेन्स में रहने से फिर यह दुनिया भी भूल जाती है।
- अपने को ठगना नहीं है कि हम तो शिवबाबा की याद में हैं।
- देह के सब धर्म भूल जाने चाहिए।
- हमको शिवबाबा कशिश कर सारी दुनिया भुलाते हैं।
- बाप समझाते हैं अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है।
- बाप तो कशिश करते हैं।
- सभी आत्मायें बाप को याद करें और कोई याद न आये।
- परन्तु सचमुच याद आती है वा नहीं, वह तो खुद पोतामेल निकालें।
- कितना हम बाबा को याद करते हैं?
- जैसे आशिक-माशूक का मिसाल है।
- यह आशिक-माशूक रूहानी हैं।
- बातें ही न्यारी हैं, वह जिस्मानी, यह रूहानी।
- देखना है - हम कितना समय दैवी गुणों में रहे?
- कितना समय बाप की सेवा में रहे?
- फिर औरों को भी याद दिलानी है।
- आत्मा पर जो कट चढ़ी हुई है वह याद के बिगर तो उतरेगी नहीं।
- भक्ति में अनेकों को याद करते हो।
- यहाँ याद करना है एक को।
- हम आत्मा छोटी बिन्दी हैं।
- तो बाबा भी छोटी बिन्दी बहुत-बहुत सूक्ष्म है।
- और नॉलेज है बड़ी।
- श्री लक्ष्मी वा नारायण बनना, विश्व का मालिक बनना कोई मासी का घर नहीं है।
- बाप कहते हैं अपने को मिया-मिट्ठू समझ ठगी नहीं करना।
- अपने से पूछो - सारे दिन में हमने अपने को आत्मा समझ बाप को कितना याद किया, जो कट निकले?
- कितनों को आपसमान बनाया?
- यह पोतामेल हर एक को अपना रखना है।
- जो करेगा वह पायेगा, नहीं करेगा तो पछतायेगा।
- देखना है हमारा कैरेक्टर सारे दिन में कैसा रहा?
- कोई को दु:ख तो नहीं दिया या फालतू बात तो नहीं की?
- चार्ट रखने से कैरेक्टर सुधरेगा।
- बाप ने रास्ता तो बताया है।
- आशिक-माशूक एक-दो को याद करते हैं।
- याद करते ही वह सामने खड़ा हो जाता है।
- दो स्त्रियां (फीमेल) हैं तो भी साक्षात्कार हो सकता है, दोनों पुरुष (मेल) हैं तो भी साक्षात्कार हो सकता है।
- कोई-कोई मित्र भाई से भी बहुत तीखे होते हैं।
- मित्रों का आपस में इतना लव हो जाता है जो भाइयों से भी न हो।
- एक-दो को बहुत अच्छा प्यार से उठा लेते हैं।
- बाबा तो अनुभवी है ना।
- तो सवेरे में बाप जास्ती कशिश करता है।
- चुम्बक है, एवर प्योर, तो वह खींचता है।
- बाप तो बेहद का है ना।
- समझते हैं यह तो बहुत लवली बच्चे हैं।
- बहुत जोर से कशिश करते हैं।
- परन्तु यह याद की यात्रा बहुत जरूरी है।
- कहाँ भी जाते हो, मुसाफिरी करते हो, उठते, बैठते, खाते याद कर सकते हो।
- आशिक-माशूक कहाँ भी याद करते हैं ना।
- यह भी ऐसे है।
- बाप को याद तो करना ही है, नहीं तो विकर्म कैसे विनाश होंगे।
- और कोई उपाय है नहीं।
- यह बहुत महीन है।
- तलवार की धार से चलना होता है।
- याद है तलवार की धार।
- घड़ी-घड़ी कहते हैं याद भूल जाती है।
- तलवार क्यों कहते हैं?
- क्योंकि इनसे पाप कटेंगे, तुम पावन बनेंगे।
- यह बहुत नाज़ुक है।
- जैसे वो लोग आग से पार करते हैं, तुम्हारा फिर बुद्धियोग चला जाता है बाप के पास।
- बाप आये हैं यहाँ, हमको वर्सा देते हैं।
- ऊपर में नहीं हैं, यहाँ आये हैं।
- कहते हैं साधारण तन में आता हूँ।
- तुम जानते हो बाप ऊपर से नीचे आया है।
- चैतन्य हीरा इस डिब्बी में बैठा है।
- सिर्फ इसमें खुश नहीं होना है कि हम बाबा के साथ बैठे हैं।
- यह तो बाबा जानते हैं, बहुत कशिश करते हैं।
- परन्तु यह तो हुआ आधा पौना घण्टा।
- बाकी सारा दिन वेस्ट गँवाया तो इससे क्या फायदा।
- बच्चों को अपने चार्ट का ओना रखना है।
- ऐसे नहीं, हम तो भाषण कर सकते हैं, चार्ट रखने की हमको क्या दरकार है!
- यह भूल नहीं करनी है।
- महारथियों को भी चार्ट रखना है।
- महारथी बहुत नहीं हैं, गिने चुने हैं।
- बहुतों का नाम-रूप आदि में बहुत टाइम वेस्ट जाता है।
- मंज़िल बहुत ऊंची है।
- बाप सब कुछ समझा देते हैं, जो स्टूडेन्ट ऐसा न समझें कि बाबा ने फलानी प्वाइंट नहीं समझाई।
- यह है मुख्य - याद और सृष्टि चक्र की नॉलेज।
- इस सृष्टि चक्र के 84 जन्मों को तो कोई नहीं जानते - सिवाए तुम बच्चों के।
- वैराग्य भी तुमको आयेगा।
- तुम जानते हो अब इस मृत्युलोक में रहने का नहीं है।
- जाने से पहले पवित्र बनना है।
- दैवीगुण भी जरूर चाहिए।
- नम्बरवार माला में पिरोने हैं।
- फिर नम्बरवार राजधानी में आने हैं।
- फिर नम्बरवार तुम्हारी भी पूजा होती है।
- अनेक देवताओं की पूजा होती है।
- क्या-क्या नाम रखते हैं।
- चण्डिका देवी का भी मेला लगता है।
- जो रजिस्टर नहीं रखते, वह सुधरते नहीं हैं।
- तो कहा जाता है यह तो चण्डिका है।
- सुनते ही नहीं हैं, मानते ही नहीं।
- यह फिर है बेहद की बातें।
- पुरुषार्थ नहीं करेंगे तो बाप कहेंगे कि यह तो बाप को भी मानने वाले नहीं हैं।
- पद कम हो जायेगा इसलिए बाप कहते हैं अपने पर बहुत नज़र रखनी है।
- बाबा सवेरे आकर कितनी मेहनत कराते हैं याद के यात्रा की।
- यह बहुत भारी मंज़िल है।
- नॉलेज को तो सस्ती सब्जेक्ट कहेंगे।
- 84 का चक्र याद करना बड़ी बात नहीं है।
- बाकी भारी माल है याद की यात्रा, जिसमें फेल भी बहुत होते हैं।
- तुम्हारी युद्ध भी इसमें है।
- तुम याद करते हो, माया पिछाड़ देती है।
- नॉलेज में युद्ध की बात नहीं।
- वह तो सोर्स ऑफ इनकम है।
- यह तो पवित्र बनना है, इसलिए ही बाप को बुलाते हैं कि आकर पतित से पावन बनाओ।
- ऐसे नहीं कि आकर पढ़ाओ।
- कहेंगे पावन बनाओ।
- तो यह सब प्वाइंट बुद्धि में रखनी है।
- पूरा राजयोगी बनना है।
- नॉलेज तो बड़ी सिम्पल है।
- सिर्फ युक्ति से समझाना होता है।
- जबान में मिठाज़ भी चाहिए।
- तुमको यह ज्ञान मिलता है।
- वह भी कर्मों अनुसार ही कहेंगे।
- शुरू से लेकर भक्ति की है तो यह अच्छे कर्म किये हैं इसलिए शिवबाबा भी अच्छी तरह बैठ समझाते हैं।
- जितनी जास्ती भक्ति की होगी, शिवबाबा राज़ी हुआ होगा तो अभी भी ज्ञान जल्दी उठायेंगे।
- महारथियों की बुद्धि में प्वाइंट्स होंगी।
- लिखते रहें तो अच्छी-अच्छी प्वाइंट्स अलग करते रहें।
- प्वाइंट्स का वज़न करें।
- परन्तु ऐसी मेहनत कोई करता ही नहीं।
- मुश्किल कोई नोट्स रखते होंगे और अच्छी प्वाइंट्स निकाल अलग रखते होंगे।
- बाबा हमेशा कहते हैं भाषण करने से पहले लिखो, फिर जांच करो।
- ऐसी मेहनत करते नहीं।
- सब प्वाइंट्स किसको याद नहीं रहती हैं।
- बैरिस्टर लोग भी प्वाइंट्स नोट करते हैं, डायरी में।
- तुमको तो बहुत जरूरी है।
- टॉपिक्स लिखकर फिर पढ़ना चाहिए, करेक्शन करना चाहिए।
- इतनी मेहनत नहीं करेंगे तो उछल नहीं खायेंगे।
- तुम्हारा बुद्धियोग और-और तरफ भटकता रहेगा।
- बहुत थोड़े हैं जो सरलता से चलते हैं।
- सर्विस बिगर और कुछ भी बुद्धि में रहता नहीं।
- माला में आना है तो मेहनत करनी चाहिए।
- बाप तो मत देते हैं फिर दिल से लगता है।
- याद नहीं तो वह खुद जानें।
- भल धन्धा-धोरी आदि करो परन्तु डायरी तो सदा पॉकेट में होनी चाहिए नोट करने लिए।
- सबसे जास्ती तुमको नोट करना चाहिए।
- अलबेले रहेंगे, अपने को मिया मिट्ठू समझेंगे तो माया भी कोई कम नहीं।
- घूँसा लगाती रहेगी।
- लक्ष्मी-नारायण बनना मासी का घर थोड़ेही है।
- बड़ी राजधानी स्थापन हो रही है, कोटों में कोई निकलेंगे।
- बाबा भी सवेरे दो बजे उठकर लिखते थे फिर पढ़ते थे।
- प्वाइंट भूल जाती थी फिर बैठ देखते थे - तुमको समझाने के लिए।
- तो समझा जाता है कि अब तक याद की यात्रा कहाँ है।
- कहाँ है कर्मातीत अवस्था।
- मुफ्त में किसकी बड़ाई नहीं करनी होती है।
- बड़ी मेहनत है, कर्मभोग होता है।
- याद करना पड़ता है।
- अच्छा, समझो मुरली ब्रह्मा नहीं, शिवबाबा चलाते हैं।
- बच्चों को सदैव समझाते हैं कि शिवबाबा ही तुम्हें सुनाते हैं, कभी बीच में यह बच्चा भी बोल देते हैं।
- बाप तो बिल्कुल एक्यूरेट ही कहेंगे।
- इनको तो सारा दिन बहुत ख्यालात करने होते हैं।
- कई बच्चों की रेसपॉन्सिबिलिटी है।
- बच्चे नाम-रूप में फँस चलायमान हो जाते हैं।
- ढेर बच्चों के ख्यालात रहते हैं - बच्चों के लिए मकान बनाने हैं, यह प्रबन्ध करना है।
- है तो यह सब ड्रामा।
- बाबा का भी ड्रामा, इनका भी ड्रामा, तुम्हारा भी ड्रामा।
- ड्रामा बिगर कोई चीज़ होती ही नहीं।
- सेकण्ड-सेकण्ड ड्रामा चलता रहता है।
- ड्रामा को याद करने से हिलेंगे नहीं।
- अडोल, अचल, स्थेरियम रहेंगे।
- त़ूफान तो बहुत आयेंगे।
- कई बच्चे सच नहीं बताते हैं।
- स्वप्न भी ढेर आते हैं।
- माया है ना।
- जिन्हें पहले नहीं आते थे उन्हें भी आयेंगे।
- बाप समझ जाते हैं, बच्चों को वर्सा पाने के लिए याद में मेहनत करनी पड़ती है।
- कोई-कोई मेहनत करते-करते थक जाते हैं।
- मंज़िल बड़ी भारी है।
- 21 पीढ़ी विश्व का मालिक बनाते हैं, तो मेहनत भी करनी पड़े ना।
- लवली बाप को याद करना पड़े।
- दिल में रहता है बाबा हमको विश्व का मालिक बनाते हैं।
- ऐसे बाप को तो घड़ी-घड़ी याद करना पड़े।
- सबसे प्यारा बाबा है।
- यह बाबा तो कमाल करते हैं, विश्व की नॉलेज देते हैं।
- बाबा, बाबा, बाबा कहकर अन्दर में महिमा गानी पड़े।
- जो याद करते होंगे, उनको बाप की कशिश होती होगी।
- यहाँ आते ही हैं बाप से रिफ्रेश होने।
- तो बाप समझाते हैं - मीठे बच्चे, ग़फलत नहीं करनी है।
- बाबा देखते हैं सभी सेन्टर्स से आते हैं।
- देखता हूँ, पूछता हूँ, किस प्रकार की खुशी है?
- बाबा जांच तो करते हैं ना।
- शक्ल से भी देखते हैं - बाप से कितना लव है?
- बाप के सामने आते हैं तो बाप कशिश भी करते हैं।
- यहाँ बैठे-बैठे सब भूल जाता है।
- बाबा बिगर कुछ भी नहीं, सारी दुनिया को भुलाना ही है।
- वह अवस्था बड़ी मीठी अलौकिक होती है।
- बाप की याद में आकर बैठते हैं तो प्रेम के आंसू भी आते हैं।
- भक्ति मार्ग में भी आंसू आते हैं।
- परन्तु भक्ति मार्ग अलग है, ज्ञान मार्ग अलग है।
- यह है सच्चे बाप के साथ सच्चा प्रेम।
- यहाँ की बात ही न्यारी है।
- यहाँ तुम शिवबाबा के पास आते हो, जरूर रथ पर सवार होगा।
- बिगर शरीर आत्मायें तो वहाँ मिल सकती, यहाँ तो सब शरीरधारी हैं।
- जानते हैं यह बापदादा है।
- तो बाप को याद करना ही पड़े।
- बहुत प्यार से महिमा करनी पड़े।
- बाबा हमको क्या देते हैं!
- तुम बच्चे जानते हो बाबा आया है हमें इस जंगल से ले जाते हैं।
- मंगलम् भगवान् विष्णु कहा जाता है ना।
- सबका मंगल करने वाला है, सबका कल्याण होता है।
- एक ही बाप है तो उनको याद करना है।
- हम क्यों नहीं किसका कल्याण कर सकते!
- जरूर कोई खामी है।
- बाप कहते हैं याद का जौहर नहीं है इसलिए वाणी में भी कशिश नहीं होती है।
- यह भी ड्रामा।
- अब फिर अच्छी तरह जौहर धारण करो।
- याद की यात्रा ही मुश्किल है।
- हम भाई को ज्ञान देते हैं।
- बाप का परिचय देते हैं।
- बाप से वर्सा पाना है।
- बाबा फील करते हैं, घड़ी-घड़ी भूल जाते होंगे।
- बाप तो सबको बच्चा समझते हैं, तब तो बच्चे-बच्चे कहते हैं।
- यह बाप तो सबका है, वन्डरफुल पार्ट है ना इनका।
- बहुत थोड़े बच्चे समझते हैं कि यह अक्षर किसके हैं।
- बाबा तो बच्चे-बच्चे ही कहेंगे।
- आया ही हूँ बच्चों को वर्सा देने।
- बाबा सब सुना देते हैं।
- बच्चों से काम मुझे लेना है ना।
- यह बहुत वन्डरफुल चटपटी नॉलेज है।
- यह नॉलेज अटपटी और खटपटी भी है।
- वैकुण्ठ का मालिक बनने के लिए नॉलेज भी ऐसी चाहिए ना।
- अच्छा, हरेक को बाप को याद करना है, दैवीगुण धारण करने हैं।
- मुख से कभी उल्टे-सुल्टे अक्षर नहीं बोलने हैं।
- प्यार से काम निकालना है। अच्छा!
अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
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